बुधवार, 20 जुलाई 2011

ग्वालियर का हृदय-स्थल

महाराज जयाजी राव साहेब शिंदे , ग्वाह्लेर नरेश के नाम पर ग्वालियर नगर के मध्य स्थित , महाराज जयाजी चौक अति सुंदर तथा ऐतिहासिक द्रीष्टी से महत्त्वपूर्ण स्थान है
श्रीमंत श्री महाराजाधिराज जयाजीराव साहेब शिंदे , ग्वालियर राज्य के एक अति विद्वान तथा दान धर्म करणे वाले नरेश के रूप में विख्यात है.
आप ने ग्वालियर  नगर में एक से  बढकर एक भव्य एवं सुंदर महलो का निर्माण करवाया.
श्रीमंत महाराजाधिराज जयाजीराव साहेब शिंदे भगवान शंकरजी के अनन्य भक्त थे तथा संपूर्ण भारत में ६९ जयेश्वर महादेव मंदिरो का निर्माण करवाया.
आप के राज्य काल (1843-1886) में महाशिवरात्री पर्व के उप्लक्ष्य में त्रीदिवसीय अवकाश शासन कि ओर से घोषित हुआ  करता था.
साथ ही इसी दिन प्रतिवर्ष एक नंदी  (सांड) का पूजन कर नंदी महाराज बनाया जाता था , जिन्हे पूरे राज्य में खुला छोड दिया जाता था . शिंदे राजवंश  कि मुहर नंदी महाराज के पिछले पैर पर अंकित कि जाती थी.
उन्हे विधिवत शिव पूजन के बाद राज्य में भेज दिया जाता था अवं महाराज जयाजीराव के आदेश पर उन्हे खाने पीने कि पूरी मुक्तता थी. नगर गण नंदी महाराज का स्वागत किया करते थे अवं वे चाहे जितना भी खाये उन्हे खिलाया जाता था. बाद में. जिसकी पुरती स्वयं महाराज शिंदे सरकार द्वारा की जाती थी.
शिंदे सरकार श्रीमंत महाराज जयाजी राव साहेब  ने भारत की प्रगती हेतू सन १८७५ में रुपये ७५,००,००० /- ग्वालियर से मथुरा तक रेल्वे लाईन बिछाने के लिये दिये. जो इक ब्रिटीश इस्ट  इंडिया
कंपनी ने अपने अधिकार में ले लिये. उनही रुपयो से आगरा- ग्वालियर रेल्वे लाईन बिछाई जा साकी.
सन १८७६ में महाराज शिंदे सरकार ने इतने ही रुपये ७५,००, ००० /-  फिर से इस्ट इंडिया कॉ. को उज्जैन - इंदोर, निमाड राजपुताना रेल्वे लाईन बिछाने के लिये दिये.
वर्तमान भारत में भी हम इन रेल्वे लाईन का उपयोग कर रहे है.


Courtesy : Neelesh Ishwarchandra, of Lashkar, Gwalior.
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